Mahadev or bhagvan vishnu ka yuddha महादेव का वृषभ अवतार
आप को पता चल ही गया होगा कि प्रभु विष्णु और महादेव ने युध्द किया था
ओर ये युद्ध बोत सालो तक हुआ था जानने के लिये पूरा ब्लॉग देखे और अच्छा लगे तो शेर कर देना
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए हैं। उनमें से वृषभ अवतार भगवान शिव ने एक बैल के रूप में लिया क्योंकि उनकी माया से विष्णु जी बैकुण्ठ को छोड़ अप्सराओं संग पाताल में रहने लगे थे। के कथा सब को सायद पता हो ओर किसको न भी पता हो
भगवांन विष्नु को माता लक्ष्मी में ये पूछा की आप के हृदय में मेरा कितना स्थान है तो भगवान विष्नु ने कहाँ मेरे आधा हृदय में महादेव वाश करते है ओर आधे ह्रदय में सम्पूर्ण जगत के साथ आप भी वाश करते हो तो माता लक्ष्मी को बुरा लगा ओर उनसे नाराज हो गई ओर कहा की जैसे मेने आप को अपने हृदय में स्थान दिया वैसे ही मुजे चाहिए
माया लक्ष्मी की पांच बेहनें भगवान विष्नु की तपस्या करती थी ओर उनको वर के रूप ने विष्नु जी चाहिए थे भगवान विष्नु ने जब प्रसन्न हो कर वरदान मागने को कहा तो उन पांच बहनो ने मांग की हमे आप को वर के रूप में पाना है ओर आप अपनी सभी भूतकाल की स्म्रति मिटा दो ताकि आप हमे कभी छोड़ के ना जा सको ओर आप हमारे साथ पाताल लोक में ही रहना होगा
फिर भगवांन ने उनकी इच्छा की पूर्ति की ओर सब भूल गए ओर वहाँ पाताल लोक में ही रेहने लगें
जब माता लक्ष्मी को पता चला तो वो शिव जी से मदद मागने गई ओर कहाँ की सब भूल चुके विष्नु जी को वापिश लाया जाए
तब भगवांन शिव जी में वृषभ अवतार लिया ओर पाताल लोक में गए वहां जा कर भगवान विष्नु से युद्ध सुरु कर दिया फिर भयंकर युद्ध हुआ ओर दोनो के बीच में युद्ध खत्म होने का नाम ही न लिया शिव जी ओर विष्नु भगवान निरंतर कहि बर्षो तक युद्ध करते रहे ओर ये युद्ध चलता ही रहा
विष्नु जी एक से एक दिव्य अस्त्रो का प्रयोग करते रहे ओर उन्हें बोध न था की वो महादेव से युद्ध कर रहे है ओर दोनो ही अपने अपने आराध्य से युद्ध करते रहे
यहाँ माता पार्वती भी चिंतित थी क्यों की ये युद्ध कब खत्म होगा ये किसी को पता नही था फिर भगवान गणेश जी ने वचन दिया माता को में लाऊंगा पिता जी को वापीस ओर वो पाताल चले गए फिर उन्हों ने सत्य से उन पांच बहनों को ये आभाष दिलाया की उन्होंने कितनी बड़ी भूल की है ओर फिर पांच बेहनो ने भगवान विष्नु को वचन मुक्त कर दिया था
मान्यता है कि शिव व विष्णु शंकर नारायण का रूप थे इसलिए बहुत समय तक युद्ध चलने के उपरांत भी दोनों में से किसी को भी न तो हानि हुई और न ही कोई लाभ। अंत में जिन पांच बेहनो ने श्री हरि विष्णु को अपने वरदान में बांध रखा था उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया। इस घटना के बाद जब श्री हरि विष्णु को इस घटना का बोध हुआ तो उन्होंने भगवान शिव की स्तुति की।
भगवान शिव के कहने पर श्री हरि विष्णु विष्णुलोक लौट गए। जाने से पूर्व वह अपना सुदर्शन चक्र पाताल लोक में ही छोड़ गए। जब वह विष्णुलोक पहुंचे तो वहां उन्हें भगवान शिव द्वारा एक और सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई।
ॐ नमः शिवाय
जय जय महाँकाल
Shiv ji ka dash mahadev के diwane
Mahadev mahadev mahadev
ओर ये युद्ध बोत सालो तक हुआ था जानने के लिये पूरा ब्लॉग देखे और अच्छा लगे तो शेर कर देना
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| प्रभु महाकाल ओर भगवान विष्णु का युद्ध |
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए हैं। उनमें से वृषभ अवतार भगवान शिव ने एक बैल के रूप में लिया क्योंकि उनकी माया से विष्णु जी बैकुण्ठ को छोड़ अप्सराओं संग पाताल में रहने लगे थे। के कथा सब को सायद पता हो ओर किसको न भी पता हो
भगवांन विष्नु को माता लक्ष्मी में ये पूछा की आप के हृदय में मेरा कितना स्थान है तो भगवान विष्नु ने कहाँ मेरे आधा हृदय में महादेव वाश करते है ओर आधे ह्रदय में सम्पूर्ण जगत के साथ आप भी वाश करते हो तो माता लक्ष्मी को बुरा लगा ओर उनसे नाराज हो गई ओर कहा की जैसे मेने आप को अपने हृदय में स्थान दिया वैसे ही मुजे चाहिए
माया लक्ष्मी की पांच बेहनें भगवान विष्नु की तपस्या करती थी ओर उनको वर के रूप ने विष्नु जी चाहिए थे भगवान विष्नु ने जब प्रसन्न हो कर वरदान मागने को कहा तो उन पांच बहनो ने मांग की हमे आप को वर के रूप में पाना है ओर आप अपनी सभी भूतकाल की स्म्रति मिटा दो ताकि आप हमे कभी छोड़ के ना जा सको ओर आप हमारे साथ पाताल लोक में ही रहना होगा
फिर भगवांन ने उनकी इच्छा की पूर्ति की ओर सब भूल गए ओर वहाँ पाताल लोक में ही रेहने लगें
जब माता लक्ष्मी को पता चला तो वो शिव जी से मदद मागने गई ओर कहाँ की सब भूल चुके विष्नु जी को वापिश लाया जाए
तब भगवांन शिव जी में वृषभ अवतार लिया ओर पाताल लोक में गए वहां जा कर भगवान विष्नु से युद्ध सुरु कर दिया फिर भयंकर युद्ध हुआ ओर दोनो के बीच में युद्ध खत्म होने का नाम ही न लिया शिव जी ओर विष्नु भगवान निरंतर कहि बर्षो तक युद्ध करते रहे ओर ये युद्ध चलता ही रहा
विष्नु जी एक से एक दिव्य अस्त्रो का प्रयोग करते रहे ओर उन्हें बोध न था की वो महादेव से युद्ध कर रहे है ओर दोनो ही अपने अपने आराध्य से युद्ध करते रहे
यहाँ माता पार्वती भी चिंतित थी क्यों की ये युद्ध कब खत्म होगा ये किसी को पता नही था फिर भगवान गणेश जी ने वचन दिया माता को में लाऊंगा पिता जी को वापीस ओर वो पाताल चले गए फिर उन्हों ने सत्य से उन पांच बहनों को ये आभाष दिलाया की उन्होंने कितनी बड़ी भूल की है ओर फिर पांच बेहनो ने भगवान विष्नु को वचन मुक्त कर दिया था
मान्यता है कि शिव व विष्णु शंकर नारायण का रूप थे इसलिए बहुत समय तक युद्ध चलने के उपरांत भी दोनों में से किसी को भी न तो हानि हुई और न ही कोई लाभ। अंत में जिन पांच बेहनो ने श्री हरि विष्णु को अपने वरदान में बांध रखा था उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया। इस घटना के बाद जब श्री हरि विष्णु को इस घटना का बोध हुआ तो उन्होंने भगवान शिव की स्तुति की।
भगवान शिव के कहने पर श्री हरि विष्णु विष्णुलोक लौट गए। जाने से पूर्व वह अपना सुदर्शन चक्र पाताल लोक में ही छोड़ गए। जब वह विष्णुलोक पहुंचे तो वहां उन्हें भगवान शिव द्वारा एक और सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई।
ॐ नमः शिवाय
जय जय महाँकाल
Shiv ji ka dash mahadev के diwane
Mahadev mahadev mahadev

nice
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